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बहन यमुना ने भाई यमराज के लिए किया था ऐसा, इस लिए मनाते हैं भाई दूज

नई दिल्ली: हर साल दिवाली के दो दिन बाद भाई-बहनों के खास त्योहार ‘भाई दूज’ मनाया जाता है। भाई-बहन के लिए जिस तरह से रक्षा बंधन का त्योहार विशेष महत्व रखता है, उसी तरह से ‘भाई दूज’ के भी खास महत्व हैं। ऐसी मान्यता है यह त्योहार भाई-बहन के बीच प्रेम और स्नेह भाव को बढ़ाता है।

Bhai Dooj 2018
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इस दिन बहनें भाई की लंबी आयु और उनके बेहतर स्वास्थ्य के लिए व्रत रखती हैं। इस पर्व को भ्रातृ द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन बहन बेरी पूजन करती हैं। बहन अपने भाइयों को तेल लगाकर गंगा यमुना में स्नान कराती हैं। यदि गंगा यमुना में नहीं नहाया जा सके तो भाई को बहन के घर नहाने की परंपरा है।

आज के दिन बहन के घर पर भाई को भोजन कराने का विशेष महत्व माना गया है। अगर सगी बहन ना भी हो तो किसी भी बहन के साथ इस परंपरा का पालन किया जा सकता है। इस दिन गोधन कूटने की पुरानी परंपरा रही है। इस दिन यमराज तथा यमुना जी के पूजन का विशेष महत्व है।

भाई दूज की कथा

पौरानिक कथाओं के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि, भगवान सूर्य की पत्नी का नाम छाया था। उनकी कोख से यमराज और यमुना का जन्म हुआ था। भाई यमराज और बहन यमुना के बीच काफी प्यार था। शादी के बाद भी यमुना ने यमराज के साथ उसी तरह का स्नेह और प्यार रखा, वो बार-बार भाई यमराज को अपने घर बुलाती थी, लेकिन हर बार यमराज अपने काम का बहाना बना कर टाल देते थे।

Why celebrating Bhai Dooj
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इस बीच कार्तिक शुक्ल के समय भी यमुना ने भाई को अपने घर भोजन के लिए निमंत्रण दिया और इस बार भाई को घर आने के लिए वचनबद्ध कर लिया। तब यमराज ने भी सोचा मुझे कोई अपने घर नहीं बुलाता क्योंकि मैं लोगों का प्राण हरता हूं, लेकिन मेरी बहन मुझे बार-बार बुलाती है, इसलिए मुझे जाना चाहिए.

कहा जाता है कि बहन के घर जाने के दौरान यमराज ने नरक में निवास करने वालों सभी प्राणियों को मुक्त कर दिया और जब वे बहन के घर पहुंचे तो बहन काफी खुश हुई। इस दौरान यमुना ने स्नान-ध्यान करके भाई के लिए तरह-तरह के व्यंजन बनाकर खिलाए। बहन के इस आदर सत्कार से यमराज भी काफी खुश हुए और वर मांगने को कहा।

जिसके बाद यमुना ने वर मांगा कि वह उन्हें वचन दे कि वह हर साल उनके घर आएंगे। हर बहन अपने भाई का इसी तरह से आदर सत्कार करे, जिससे की दोनों के बीच निरंतर स्नेह बना रहे। इस दौरान यमरान ने अपनी बहन को आशिर्वाद दिया और वहां से चले गए। यही कारण है कि इस दिन यमराज और यमुना की पूजा होती है और ऐसी मान्यता है कि आज के दिन जो अतिथियों का सत्कार करते हैं उन्हें यम का भी भय नहीं होता।