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महापर्व का तीसरा दिन- 36 घंटे का कठोर निर्जला व्रत शुरू, आज डूबते हुए सूर्य को अर्घ

पटना: “कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाये” ये एक लोकप्रिय गीत है, ऐसे और भी कई गीत है जो इन दिनों लोगों के घरों में गुंज रहे हैं। ये गीत छठी मइया को समर्पित जिसे आम तौर पर महिलाएं उस समय गाती हैं जब घर से अर्घ देने लिए व्रती छठ घाट के लिए जाते हैं।

Third day of Chhath Mahaparv

आपको बता दें कि लोक आस्था के महापर्व छठ की छटा पूरी तरह से बिखर चुकी है, छट घाट पूरी तरह से सज चुके हैं और घाटों पर प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतेजाम किए गए हैं। कई घाटों पर गोताखोरों की भी तैनाती की गई है, ताकि किसी भी अप्रीय घटना से समय रहते निपटा जा सके।

दरअसल, इन दिन खात तौर पर यूपी, बिहार और बंगाल में चार दिनों तक चलने वाले महापर्व छठ पूजा की धूम दिख रही है। 12 नवंबर को दूसरे दिन छठ व्रत करने वाले व्रती ने खरना मनाया इस दिन देर शाम खीर का प्रसाद बनाकर छठी मइया को भोग लगाया गया और प्रसाद वितरण किया गया।

जिसके बाद आज तीसरे दिन 13 नवंबर की शाम में समय व्रती छठ घाट पर जाकर डूबते हुए सूर्य को अर्घ देंगे और फिर इसके अलगे दिन सुबह 14 नवंबर को उगते हुए सूर्य को अर्घ देने के बाद इस महापर्व का समापन होगा। बता दें कि सोमवार को खरना के बाद से 36 घंटे का कठोर निर्जला व्रत शुरू हो गया।

इस 36 घंटों के दौरान व्रत करने वाले जल तक ग्रहण नही करते है। शम और सुबह में छठी मइया और भगवान सूर्य को अर्घ देते हुए से सुख, शांति और समृद्धि की कामना करेंगे।